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सोलह सोमवार व्रत नियम, सोमवार व्रत कैसे करें

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सोलह सोमवार व्रत की बहुत अधिक मान्यता है ऐसा माना जाता है की इस व्रत को पूरे भक्तिभाव, श्रद्धा और विश्वास से रखने पर व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती है। यह व्रत भोलेबाबा के लिए रखा जाता है। इस व्रत को लोग अलग अलग मनोकामना के लिए रखते है और उनका विश्वास होता है की ऐसा करने से उनकी मनोकामना बाबा जरूर पूरी करेंगे। इस व्रत को कुँवारी लडकियां अच्छे वर की इच्छा, तो कोई अपने घर में सुख शांति, कारोबार में तरक्की, नौकरी पाने की इच्छा, आदि के लिए रखते है।

यह व्रत शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार से शुरू किया जाता है। इस व्रत का फल तभी मिलता है जब आप पूरे भाव से इसे रखते है, और इसके सभी नियमो का पालन करते हैं। साथ ही यह व्रत लगातार सोलह सोमवार तक चलता है आप बीच में इसे नहीं छोड़ सकते है। क्योंकि फिर यह सोलह सोमवार नहीं माने जाते है। क्या आप भी सोलह सोमवार का व्रत करने जा रहे है यदि हाँ तो आइये आज हम आपको सोलह सोमवार व्रत के नियम और यह व्रत किस प्रकार किया जाता है विस्तार से बताते है।

सोलह सोमवार व्रत कैसे करें:-

  • व्रत के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कर लेना चाहिए। और हो सके तो नहाने के पानी में गंगा जल या काले तिल मिला लेने चाहिए इसे शुभ माना जाता है।
  • शरीर पर पानी डालने से पहले इस मन्त्र का जाप करें, ” ॐ गंगे च गोदावरीनर्मदेसिंधुकावेरी अस्मिन जलं सन्निधिं कुरु।। “
  • प्रत्येक सोमार बालों को आवश्य धोएं,।
  • उसके बाद अच्छे से अपने मंदिर को साफ़ करें, और पूजा अर्चना की तैयारी करें।
  • उसके बाद सोलह सोमवार के लिए सबसे जरुरी होता है की आटे को घी में भूनकर प्रसाद बनाएं।
  • इसमें आप चीनी या बूरा भी मिला सकते हैं, साथ की केला या अन्य किसी फल को भी काटकर इसमें मिलाएं।
  • उसके बाद पूजा के लिए निम्न चीजों का इस्तेमाल जरूर करें, सफेद चन्दन, श्वेत फूल, अक्षत, पंचामृत, पान, सुपारी, फल, गंगा जल, बेलपत्र, धतूरा-फल और धतूरा-फूल।
  • उसके बाद भगवान् की पूजा अर्चना करें, व्रत में शिव पार्वती की पूजा करने के साथ गणेश जी कार्तिकेय और नंदी की पूजा भी जरूर करनी चाहिए।
  • सोलह सोमवार कथा भी पढ़नी चाहिए आप चाहे तो इसे अपने घर में या मंदिर जाकर भी कर सकते हैं।
  • शिव आरती करने के बाद प्रसाद को तीन भागो में बाँट लें, और उसका एक भाग किसी मंदिर में, दूसरा भाग लोगो में वितरित करें और तीसरे भाग को खुद ग्रहण करें।
  • और सोलह सोमवार के बाद सत्रहवें सोमवार को पूरे भाव के साथ उद्यापन करना चाहिए।

सोलह सोमवार व्रत नियम:-

  • सोलह सोमवार का व्रत रखते समय इस बात का ध्यान रखें की जो भोजन आप पहले दिन ग्रहण करते है, यदि वो मीठा होता है तो आपको सभी सोमवार मीठे भोजन को हो खाना पड़ता है, और यदि नमकीन भोजन का सेवन करते हैं तो नमकीन भोजन हो खाना चाहिए।
  • प्रसाद में आप पहले व्रत के दिन जिस फल का इस्तेमाल करते है उसी फल का इस्तेमाल आपको पूरे सोलह सोमवार तक करना चाहिए।
  • यदि कोई महिला उपवास रखती है और बीच में उसे मासिक धर्म हो जाता है तो उसे वो व्रत नहीं छोड़ना चाहिए बल्कि उस दिन समय से उठाकर नहा धो लेना चाहिए और किसी और से कथा सुननी चाहिए क्योंकि इस व्रत को बीच में नहीं छोड़ना चाहिए।
  • सुबह शाम दोनों समय शिव आरती करनी चाहिए।
  • दूसरो की बुराई नहीं करनी चाहिए, क्रोध नहीं करना चाहिए, आलस नहीं करना चाहिए, किसी का मन नहीं दुखाना चाहिए, यदि आप ऐसा करते है तो आपका व्रत सम्पूर्ण नहीं होता है।
  • इस व्रत के उद्यापन को वैसे तो सत्रहवें सोमवार को ही करना चाहिए लेकिन यदि आप किसी कारणवश इसे नहीं कर पाए हैं तो आपको व्रत छोड़ने नहीं चाहिए बल्कि उपवास रखते रहना चाहिए और अगले सोमवार को उद्यापन करना चाहिए।

तो ये है सोलह सोमवार को आपको कैसे करना चाहिए, और इसके कुछ नियम, यदि आप सोलह सोमवार के व्रत का फल पाना चाहते है तो इस पूरी श्रद्धा के साथ करें। भोलेबाबा जल्द ही आपके मन की पुकार सुनेंगे और आपकी मनोइच्छा को पूर्ण करेंगे।