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सीता नवमी २०१८ डेट, जानकी नवमी पूजन का शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्व

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त्रेता युग में भगवान विष्णु के रामावतार लेने के पश्चात माँ लक्ष्मी ने मिथिला राज्य में सीता के रूप में जन्म लिया। और सीता नवमी उन्ही के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है। माँ सीता को जानकी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि वे मिथिला के राजा जनक की पुत्री थी।

सीता नवमी वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। माँ सीता का जन्म नवमी तिथि को हुआ था जबकि उसे ठीक एक माह पूर्व चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में राम नवमी के दिन श्री राम का जन्म हुआ था।

हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक यह पर्व श्री राम नवमी के ठीक एक माह बाद मनाया जाता है। पौराणिक क्तःओं के अनुसार माँ सीता वास्तविकता में राजा जनक की पुत्री नहीं थी। राजा जनक ने इन्हें गोद लिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक दिन राजा जनक खेतों में हल जोत रहे थे, और वहीं उन्हें एक सोने की टोकरी में छोटी सी कन्या दिखाई दी। राजा ने उस कन्या को गोद ले लिया और उनका नाम सीता रखा।

सीता नवमी के दिन की जाने वाली परंपराए :

इस दिन बहुत सी महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु के लिए पुरे दिन उपवास रखती है। जिसमे पूजन समाप्त होने तक एक अन्न का दाना भी नहीं खाती। और यह प्रार्थना करती है की वे जब तक जीवित रहे सुहागन रहे। इसके अलावा इस दिन भगवान राम, लक्ष्मण और माँ सीता के पूजन का भी विधान है। बहुत से मंदिरों में इस दिन महा अभिषेक, श्रृंगार दर्शन और महा आरती का भी आयोजन किया जाता है। और साथ ही भजन और रामायण के पाठ भी गाए जाते है।

सीता नवमी 2018 पूजा मुहूर्त

2018 में सीता नवमी 24 अप्रैल 2018, मंगलवार के दिन मनाई जाएगी।

सीता नवमी में पूजा का सही समय

पूजा का शुभ मुहूर्त = 11:01 से 13:37 तक।
मुहूर्त की अवधि = 2 घंटा 35 मिनट

सीता नवमी के दिन मध्याह्न समय = 12:19

नवमी तिथि का प्रारंभ 23 अप्रैल 2018, सोमवार 14:16 पर होगा। जिसका अंत 24 अप्रैल 2018, मंगलवार 12:25 मिनट पर होगा।