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Basant Panchami 2019 : सरस्वती पूजा विधि, सरस्वती पूजा डेट 2019

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बसंत पंचमी हिन्दू धर्म में मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। जिसे सभी क्षेत्रों में हर्षोल्लास से मनाया जाता है। बसंत पंचमी को सरस्वती पूजा भी कहा जाता है। बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा की जाती है। भारत के पूर्वी राज्यों में सरस्वती पूजा बड़े धूम-धाम से मनाई जाती है। यहाँ सरस्वती पूजा का महत्व, सरस्वती पूजा क्यों मनाई जाती है और सरस्वती पूजा की विधि बता रहे हैं।

सरस्वती पूजा (बसंत पंचमी)

माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सरस्वती पूजा मनाई जाती है। इस दिन को बसंत पंचमी भी कहते हैं। क्यूंकि इस दिन से बसंत ऋतू का आरंभ होता है।

देवी सरस्वती कौन है?

शास्त्रों के अनुसार, देवी सरस्वती विद्या, बुद्धि, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी है। सृष्टि की रचना के लिए देवी शक्ति में खुद को पांच भागों में विभक्त कर लिया। वो पांच भाग राधा, पार्वती, सावित्री, दुर्गा और स्वस्ति के रूप में भगवान श्री क्रीड़न के विभिन्न अंगों से उत्पन्न हुईं। श्री कृष्ण के कंठ से देवी सरस्वती उत्पन्न हुई। इसलिए देवी सरस्वती को वाणी और कंठ की देवी माना जाता है। देवी सरस्वती को वाक्, वाणी, गी, गिरा, बाधा, शारदा, वाचा, श्रीश्वरी, वागीश्वरी, ब्राह्मी, गौ, सोमलता, वाग्देवी और वाग्देवता आदि नामों से भी जाना जाता है।

बसंत पंचमी

सरस्वती पूजा के दिन बसंत पंचमी भी मनाई जाती है। इस दिन देवी सरस्वती का विधि-विधान से पूजन किया जाता है और वसंतोत्स्व मनाया जाता है। सरस्वती पूजा हर साल बसंत पंचमी के दिन ही की जाती है। कई क्षेत्रों में इस दिन छोटे बालकों का अक्षरारांभ और विद्यारंभ भी किया जाता है।

बसंत पंचमी के दिन शुभ काम

सरस्वती पूजा के दिन मांगलिक कार्य करना भी बहुत शुभ होता है। इस दिन को अबूझ मुहूर्त के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन नींव पूजन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदारी, नया व्यापार शुरू करना, भूमि पूजन, दुकान उद्घाटन, गाडी खरीदना, आदि मांगलिक कार्य करना शुभ होता है। परन्तु विवाह और उससे जुड़े कार्यों को लिए पंचांग में दिए गए मुहूर्त ही चुनने चाहिए।

रंग का महत्व

बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का बहुत खास महत्व होता है। इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनते है और पीले पकवान बनाते हैं। जबकि सरस्वती पूजा में सफ़ेद रंग की चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। पूजा में – दूध, दही, मक्खन, सफ़ेद तिल के लड्डू, गन्ना या गन्ने का रस, पका हुआ गुड़, मधु, श्वेत चन्दन, श्वेत पुष्प, श्वेत परिधान, श्वेत अलंकार, खोए का श्वेत मिष्ठान, अदरक, मूली, शर्करा, सफ़ेद धान के अक्षत, तण्डुल, शुक्ल मोदक, पके हुए केले की फली का पिष्टक, नारियल, नारियल जल, श्रीफल, बदरीफल, पुष्प फल आदि का प्रयोग किया जाता है।

सरस्वती पूजा विधि

बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन का बहुत खास महत्व होता है। देवी सरस्वती विद्या और ज्ञान की देवी हैं उनका पूजन करने से ज्ञान का आशीर्वाद मिलता है। पूजन के लिए सबसे पहले प्रातःकाल जल्दी जागकर स्नान कर लें और पीले या सफ़ेद वस्त्र पहन लें। माँ सरस्वती की प्रतिमा या चित्र को उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें। प्रतिमा स्थापित करने के बाद माँ सरस्वती को सफ़ेद चंदन, पीले और सफ़ेद फूल अर्पित करें। पुष्प अर्पित कर माँ का ध्यान करें और ऊं ऐं सरस्वत्यै नम: मंत्र का 108 बार जाप करें। जाप करके माँ सरस्वती की आरती करें। आरती के बाद दूध, दही, मधु, तुलसी और जल मिलाकर पंचामृत बनाएं और माँ को भोग लगाएं। इसके अलावा खोए की मिष्ठान, नारियल, सफ़ेद तिल के लड्डू आदि माँ को भोग लगाएं। भोग के बाद प्रसाद वितरित करें।


सरस्वती पूजा 2019 (Basant Panchami 2019)

2019 में बसंत पंचमी (सरस्वती पूजा) 10 फरवरी 2019, रविवार को मनाई जाएगी। 

सरस्वती पूजा 2019 शुभ मुहूर्त

सरस्वती पूजा मुहूर्त = प्रातः 06:40 से 12:12 तक। 

पंचमी तिथि आरंभ = 9 फरवरी 2019, शनिवार को 12:25 बजे से होगा। 
पंचमी तिथि समाप्त = 10 फरवरी 2019, रविवार को 14:08 बजे होगा।