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गंगा दशहरा 2018, गंगा स्नान का महत्व और क्यों मनाया जाता है गंगा दशहरा

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Ganga Dussehra 2018 : हिन्दू धर्म में गंगा को देवी का स्थान प्राप्त है, इसलिए उनसे जुड़े प्रत्येक पर्व को बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है फिर चाहे वो गंगा सप्तमी हो या पूर्णिमा का स्नान। गंगा दशहरा भी उन्ही पर्वों में से एक है जिसे पुरे भारत में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। गंगा दशहरा हिन्दुओं के महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है जिसे ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व अधिकतर मई या जून के महीने में आता है। माना जाता है इस दिन माँ गंगा का पृथ्वी पर आगमन हुआ था इसलिए पुराणों में इस दिन गंगावतारण् भी कहा जाता है।

स्कंद पुराण के अनुसार गंगा दशहरे के दिन गंगा में स्नान आदि करने से बहुत लाभ मिलता है, यदि संभव ना हो तो घर में मौजूद पानी में थोडा सा गंगा जल डालकर भी स्नान करने से गंगा स्नान का फल प्राप्त होता है।

Ganga Dussehra 2018 : 2018 में गंगा दशहरा 24 मई 2018, गुरुवार को मनाया जाएगा।

गंगा दशहरा की परंपराएं (Ganga Dussehra Date) :गंगा दशहरा पूजा

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, गंगा दशहरा वह समय होता है जब माँ दंगा का पृथ्वी पर आगमन हुआ था इसलिए इस दिन गंगा में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। कहते है गंगा दशहरे के दिन गंगा में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते है और व्यक्ति रोग मुक्त हो जाता है। इसके अलावा इस दिन दान पुण्य करना भी बहुत लाभकारी माना जाता है। लेकिन इसके पीछे एक मान्यता है जिसके अनुसार गंगा दशहरा के दिन दान की जाने वाली चीजों या खाद्य पदार्थों की संख्या 10 होनी चाहिए। माना जाता है मृत्यु के पश्चात मोक्ष प्राप्त करने के लिए इस दिन दान करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। – Ganga Dussehra Puja timings

गंगा दशहरा एकमात्र ऐसा पर्व है जब गंगा के सभी तटों व उनके आसपास या घाट पर मौजूद मंदिरों की अच्छे से सजावट की जाती है। और यह सजावट देखने में वाकई बहुत आकर्षक लगती है। गंगा दशहरे के दिन भक्तगण प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व ही माँ गंगा की पवित्र धारा में दुबकी लगाकर अपने सभी पापों से छुटकारा पा लेते है। इस दौरान हजारों भक्त इलाहाबाद/प्रयाग, गढ़मुख्तेश्वर, हरिद्वार, ऋषिकेश और वाराणसी के पवित्र गंगा घाटो पर स्नान करने आते है।

हरिद्वार में इस दौरान गंगा घाट की अलग ही रौनक देखने को मिलती है। इसके अलावा वाराणसी में भी इस दिन महा आरतियों का आयोजन किया जाता है जो किसी बड़े यज्ञ से कम नहीं लगती। गंगा दशहरा के दिन कई भक्त दशाश्वमेध घाट की आरती देखने घाट आते है और आरती के पश्चात् गंगा में स्नान करते है।

When is Ganga Dussehra in  2018 : गंगा दशहरा की कथा

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जिस दिन माँ गंगा का धरती पर आगमन हुआ था उसे गंगा दशहरा कहा जाता है। कहते है भागीरथ अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए उनकी अस्थियों को गंगा में विसर्जित करना चाहते है जिसके लिए उन्होंने माँ गंगा से धरती पर आने का आग्रह किया। परन्तु, अपनी धारा तेज होने के कारण उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया।

जिसपर भागीरथ ने इस समस्या का समाधान पूछा। और माँ गंगा ने शिव जी को इसका उपाय बताया। जिसके बाद माँ गंग अकी प्रचंड धारा को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समा लिया और फिर नियंत्रित वेग से गंगा को पृथ्वी पर प्रवाहित किया। जिसके बाद भागीरथ ने अपने पूर्वजों की अस्थियाँ प्रवाहित कर उन्हें मुक्ति दिलाई। तभी से इस दिन को माँ गंगा के जन्म दिन के रूप में मनाया जाने लगा। कहते है गंगा दशहरा के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करने का खास महत्व होता है।

एक बात ध्यान रखें, गंगा दशहरा और गंगा सप्तमी (गंगा जयंती) दोनों अलग-अलग पर्व है। गंगा दशहरा वो समय है जब माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था जबकि गंगा जयंती वो दिन है जब माँ गंगा का पुनः धरती पर अवतरण हुआ था।