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दुर्गा अष्टमी 2018 : चैत्र नवरात्री में दुर्गा अष्टमी कैसे करें?

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चैत्र नवरात्री जो की १८/०३/२०१८ से प्रारंभ हुई है, और भक्तगण बड़े ही भक्ति भाव से पूजा अर्चना के साथ साथ व्रत कर रहे हैं। माँ को हरसंभव खुश करने का प्रयास कर करे हैं ताकि घर में सुख शांति और मनोकामना पूर्ण हो।

पहले दिन के कलश स्थापना के साथ ही माँ दुर्गा की अराधना भक्तगण कर रहे हैं। पर अब जिसका इंतजार है वो है अष्टमी का, सब लोग इन्टरनेट पर भी सर्च करना शुरू कर दिया है की अष्टमी कब है 2018 चैत्र नवरात्री में? क्यों की नवरात्री में या दुर्गा पूजा में अष्टमी का या महाष्टमी का बहूत ही ज्यादा महत्व है। महाष्टमी के पूजा के बाद ही भक्त अपना व्रत तोड़ते हैं है पारण करते हैं।

आपको चैत्र मास की नवरात्री का अष्टमी कब है इसके बारे में और पूजा की विधि के बारे में बताने जा रहे हैं।

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 2018 कुल 8 दिन की है। जिसमे अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ रही है। चैत्र नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि 25 मार्च 2018 को पड़ रही है।

चैत्र नवरात्री 2018 में अष्टमी पूजन 25 मार्च 2018 को किया जाएगा।

क्या किया जाता है अष्टमी के दिन नवरात्री में?

Ashhtimi Kanya Pujan vidhi  : किसी भी नवरात्री हो चाहे चैत्र महीने का या आश्विन मैहिने का नवरात्री में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। अष्टमी के दिन बड़े ही भाव से कन्या पूजन करते हैं। कहा जाता है है की जब तक आपने कन्या पूजन नहीं किया तब तक व्रत का फल नहीं मिलता या व्रत पूरा नहीं होता। माता रानी (दुर्गा माँ) बहूत ही प्रसन्न होती है अगर कन्या पूजन किया जाय तो, आप खुद ही समझ लीजिये भला कौन ऐसा होगा जो कन्या पूजन नहीं कराए।

पर ध्यान रहे आप अपने सामर्थ के अनुसार ही कन्या पूजन करें।

क्या करें कन्या पूजन में ?
पूजन के लिए अष्टमी के दिन सामर्थ्य अनुसार 5, 7, 9 या 11 कन्यायों को अपने घर पर भोजन के लिए आमंत्रित कर लें। ध्यान रहे कन्यायों की उम्र 2 से 10 वर्ष तक होनी चाहिए। उसके पश्चात् सभी को घर में बुलाकर सर्वप्रथम उनके पैर धुलवाएँ और साफ़ स्थान पर उचित आसन देकर पंक्ति में बैठा दें।

घर आये कन्याओं का पैर धोकर तिलक लगा कर और फिर कलाई पर कलावा (मोली) बांधे। आप अपने यथाशक्ति भोजन कराएँ। भोजन करने के पश्चात् उन्हें अपनी सामर्थ्यानुसार कोई भेंट और दक्षिणा देकर विदा करें। विदा करते समय परिवार के सभी सदस्य कन्यायों के पैर अवश्य छुएं और उनसे आशीर्वाद लें। मान्यता है विधिवत अष्टमी पूजन करने से भक्तों की सम्पूर्ण इच्छाएं माँ भगवती पूर्ण करती है। जय माता दी।