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अक्षय तृतीया 2018 के दिन किन-किन वस्तुओं का दान करना चाहिए?

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Akshaya Tritiya 2018 : अक्षय तृतीया जिसे आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है हिन्दू धर्म में मनाये जाने वाले महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। आखा तीज का पर्व वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया जाने वाला प्रत्येक कार्य शुभ और अच्छा फल प्रदान करता है। इसलिए इस दिन गृह प्रवेश से लेकर शादी विवाह तक बहुत से शुभ कार्य भी जाते है। यूँ तो साल भर के सभी बारह महीनों में आने वाली शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को शुभ माना जाता है। लेकिन उन सभी में वैशाख माह में आने वाली तृतीया को सबसे अधिक शुभ माना जाता है। इसलिए इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।

अक्षय तृतीया 2018

2018 में अक्षय तृतीया 18 अप्रैल 2018, बुधवार को पड़ रही है।

अक्षय तृतीय में लक्ष्मीनारायण पूजन का समय

अक्षय तृतीया पूजन का शुभ मुहूर्त = 05:56 से 12:20 तक।
मुहूर्त की अवधि = 6 घंटा 23 मिनट

(नोट : यहाँ समय IST 24 hrs. के हिसाब से लिखा गया है।)

अक्षय तृतीया का महत्व (Importance Of Akshaya Tritiya) :-

हिन्दू धर्म में अक्षय तृतीया के दिन को किसी भी मांगलिक कार्य के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन बिना कोई पंचांग और मुहूर्त देखे शादी की जाती है। इस दिन को किसी भी मांगलिक कार्य को करने के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

अक्षय तृतीया 2018, 18 अप्रैल बुधवार को सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 04:47 मिनट से प्रारंभ हो रहा है जो अगले दिन प्रातः 03:03 तक है। माना जाता है सर्वार्थसिद्धि योग मुहूर्त में शुभ कार्य करना अत्यंत शुभ होता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग :

सर्वार्थ सिद्धि योग, ग्रहों के ऐसे योग को कहा जाता है। जिसमे किसी भी तरह के शुभ कार्य को बिना किसी विघ्न के पूर्ण किया जा सकता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस मुहूर्त में कार्य करने के लिए शुक्र अस्त, पंचक, भद्रा, राहू काल या किसी अन्य अशुभ मुहूर्त पर विचार करने की आवश्यकता नहीं होती। इस मुहूर्त में गृह प्रवेश से लेकर खरीदारी तक सभी तरह के शुभ कार्य कर सकते है।

अक्षय तृतीया 2018 में दान का महत्व (Akshaya Tritiya 2018)अक्षय तृतीया 2018

इस पर्व को सभी हिन्दू पर्वों में बहुत ख़ास माना जाता है। इसलिए इस दिन सभी तरह के शुभ कार्य किये जाते है। पत्रिका के अनुसार नवग्रहों की दशा के कारण यदि किसी व्यक्ति के विवाह का दिन निश्चत नहीं हो पाता तो अक्षय तृतीया के दिन बिना मुहूर्त के उस व्यक्ति का विवाह किया जा सकता है। इस दिन को दान का महापर्व भी कहा जाता है। पुराणों के मुताबिक इस दिन दान-धर्म करने वाले व्यक्ति को वैकुंठ में स्थान मिलता है।

अक्षय तृतीया में किन वस्तुओं का दान करना चाहिए :मटके दान में देना

शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया में ठंडी चीजें जैसे जल से भरा हुआ घड़ा, पंखे, सकोरे, खराऊ, छाता, चावल, नमक, घी, खरबूजा, ककड़ी, सत्तू, इमली, साग आदि का दान देना बहुत फलदायी होता है।

ज्योतिष के अनुसार इस दिन शंख और मोर का पंख खरीदने से भाग्योदय होता है। इसके अतिरिक्त इस दिन सोना खरीदना भी बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों में शंख को भगवान् विष्णु और माँ लक्ष्मी की प्रिय वास्तु बताया गया है। इसीलिए इस दिन इसे खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। एक और बात शंख खरीदकर सबसे पहले उसका अभिषेक करना चाहिए और उसके पश्चात् ही मंदिर या पूजा घर में रखना चाहिए। इसके अलावा अगर आप अक्षय तृतीया के दिन सोना या उससे बने आभूषण खरीदते है तो सर्वप्रथमन लक्ष्मी पूजा करें और उसके पश्चात् उन्हें घर में रखें।